बंद आँखों से
दुनिया कैसी दिखती है?
सितारों से दूर
जहां कोई खुशबु,झरना
और नदी बहती है
प्रेम के अंकुर फूटते हैं जहां
जन्नत से जो कम नहीं
दुनिया ऐसी ही दिखती है .....
एक कुफ्र टूटा
खुदा खुदा करके
एक टूटेगा
तौबा करके.
ये दर्द जिसे पालता हूँ
बरस दर बरस
सालता हूँ
यही तो मुझे मंजिल की
याद दिलाते हैं.
कहाँ जाना है
यही तो बताते हैं!
कहाँ गयी यादों की अरुणाई
बाग़-बाग़ कोयल बोले
कहाँ है वो अमराई?
वो जुगनुओं का जमघट
फूलों पर मंडराते भंवरे
तितलियों के मनमोहक रंग
कहाँ खो गए?
कहाँ गयी रिश्तों की गरमाई?
प्रकृति से सुन्दर कुछ है?
ईश्वर से सुन्दर कुछ है?
आत्मा से सुन्दर कुछ है?
व्यवहार से भी सुन्दर कुछ है?
तन की सुन्दरता क्षणभंगुर है
माटी की काया
एक दिन माटी में मिल जायेगी
फिर कहो
तन की सुन्दरता क्या
तब भी बनी रह पाएगी?
फिर इस सुन्दरता के क्या मायने?
एक प्रेम अनुमानित
दूजा प्रेम सघन मौन!
दो ह्रदय मिलन को प्यासे
लेकिन पहल करे कौन??
वाह! विधाता
अजब यह खेल रचा
एक आकृति मस्तक पर खींच
हाथ से दी रेखा मिटा !!