October 29, 2009

45. कहाँ है अमराई?

कहाँ गयी यादों की अरुणाई
बाग़-बाग़ कोयल बोले
कहाँ है वो अमराई?
वो जुगनुओं का जमघट
फूलों पर मंडराते भंवरे
तितलियों के मनमोहक रंग
कहाँ खो गए?
कहाँ गयी रिश्तों की गरमाई?

4 comments:

योगेन्द्र मौदगिल said...

wah.....

sensitive niv said...

बहुत सही कहा आपने

Devina said...

Aati rehengi bharen , jati raengi bharen.DIL ki nazar se DUNIYA ko dekho. DUNIYA sada he hansi (beautiful) hai.

आमीन said...

मुझे भी नही पता कि अमराई कहाँ गई