January 16, 2010

ए लहरों ठहरो

 ए सुनामी लहरों 
जहां हो वहीँ ठहरो 
जिसके साथ 
खेल रही हो 
वह कोई खिलौना नहीं 
दिल है मेरा! 
दूर ही रहो 
नहीं तो ...
तुम्हें भी सुर्ख कर देगा 
अपने खून से
सागर को रंग देगा!
लाख जतन कर लो 
तुम थक जाओगी 
पर मिटा न सकोगी
इस दिल को भुला न सकोगी...










1 comment:

संजय भास्कर said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति संवेदनशील हृदयस्पर्शी मन के भावों को बहुत गहराई से लिखा है