August 17, 2013

आज़ादी ले लोsss

आज़ादी ले लोsss
अभिव्यक्ति का गला घोंटने के लिए
लोकतंत्र का जनाज़ा निकालने के लिए
आज़ादी ले लोsss…
बेटियों-बहनों की अस्मत लूटने के लिए
देश को खोखला करने के लिए
आज़ादी ले लोsss...
६६ साल की रवायत कायम रखने के लिए
१२५ करोड़ की टोपी घुमाने के लिए
आज़ादी ले लोsss....


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ने sssss ता
इसमें सुर और ताल दोनों है
सा रे गा मा प ध नि
ता थई थई तत आ
जनता ही बेसुरी है.

July 22, 2013

क्षणिकाएं

ये जो दर्द है
यही मेरा हमदर्द है
पर ज़रा आहिस्ता कुरेदना
ये बड़ा बेदर्द है.
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काश कभी ऐसा होता
मेरा भगवान, तेरा ख़ुदा होता
एक ही घर में घंटियाँ बजतीं
एक ही घर में अजान होता
काश कभी ऐसा होता!

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तुम्हारी उलझी लटों में
मेरे कुछ ख्वाब फंसे हैं
ये लट सुलझा लो
मेरे ख्वाब गिरा दो.
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उस दिन तुम और करीब आ गए
जब हक़ीक़त से ख्वाब बन गए.
 
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तेरी मुहब्बत का असर इतना है
कि जेहन में नफ़रत का ख्याल नहीं आता
सोचो, गर मुहब्बत न होती तो क्या होता?


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किसकी भैंस गयी पानी में
किसका भला करेगा राम?
मेंढकी अलाप रही राग अलग
देखिये किसे होता है जुकाम?

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बरस रहा है मानसून, बूँदें हैं अनमोल
धीरे-धीरे खुल रही नेताओं की पोल

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नेता का पहाड़ा

नेता एकम नेता
नेता दूनी भाषण
नेता तिया आश्वासन
नेता चौके कुर्सी
नेता पंजे सियासत
नेता छके दल-बदल
नेता सत्ते मौका परस्त
नेता अठे घोटाला
नेता नवें दर्शन दुर्लभ
नेता दहाई पांच साल में प्रकट.
























 

June 7, 2013

हादसों का शहर

ये हादसों का शहर है
यहाँ न जाने
कब किसकी संवेदना मर जाए
और पल भर में
किसी की जेब कट जाये!

यहाँ मृत संवेदनाएं
सड़कों पर मौत बेलगाम दौड़ती हैं
बी एम डबल्यू कारें सरेआम रौंदती हैं
बेटियों की अस्मत भी महफूज़ नहीं
न जाने कब कोई हादसा हो जाये!

हर हाथ में चाकू
यहाँ हर शख्स चक्कूबाज़
फिक्रमंद दिल कब तक खैर मनाये
कोई नहीं जानता
कब किसकी अंतरात्मा आत्मा मर जाए!

आँखों में फ़रेब
साफ़ झलकता है
आइना भी हक़ीक़त छिपाता है
मैंने यहाँ आँखों में सूअर के बाल देखे हैं
पर नहीं जानता कौन घड़ियाली आंसू टपका जाए!

साहिबान मैं आयातित हूँ
इस भीड़ का हिस्सा नहीं
लाचारी है माहौल में ढलता नहीं
सोचता हूँ
शायद किसी रोज़ इसी भीड़ में अपना कोई मिल जाये!


 










 

मेरे पीछे मत आना

मेरे पीछे मत आना,
यह रास्ता आगे बंद है
तुमने जिस वजह से छोड़ा,
वो जेब आज भी तंग है.

ख्यालों में आसरा मांगने वालों
मेरे हाल पर छोड़ दो
मुझ तक पहुँचने के रास्ते
बहुत तंग हैं.

तुमने, उसने
हर इक शख्स ने
जो भी दिया, बेपनाह दिया
उसका गवाह ये अंग है.

दुआ करना...कभी सामना न हो
ग़र हो भी जाये
तो फासला रखना
क्योंकि क्रोध पर मेरा नियंत्रण कम है.

March 2, 2013

नेता

हम अपना पेट सहलाते हैं,
तुम भूख भूख चिल्लाओ
फिर भी जो सुन नहीं सकते
वो नेता बन जाएँ...

आइये हाथ उठायें

आइये हाथ उठायें
क्योंकि आसमान सिर पर है
और सूरज को मुट्ठियों में भरना है
कल के उजाले के लिए.

आइये हाथ उठायें
क्योंकि अब वक़्त दुआ नहीं
जड़ से उखाड़ने का है
साफ़ मिट्टी में तन कर खड़े होने का है.

आइये हाथ उठायें
क्योंकि हम मरे नहीं हैं
संवेदनाएं अब भी जिंदा हैं
इसलिए मुट्ठियाँ भींच जाती हैं कभी-कभी.

आइये हाथ उठायें
क्योंकि आत्मा लहुलूहान
लेकिन रीढ़ सलामत है
और लाचार लताओं का सहारा बन सकते हैं.

आइये हाथ उठायें
क्योंकि सड़ी हुई व्यवस्था की सडांध
नथुनों में घुसपैठ कर
बेचैन करने लगी है
और भ्रष्टाचार की जड़ें जकड़ने को तैयार हैं.