एक कुफ्र टूटा
खुदा खुदा करके
एक टूटेगा
तौबा करके.
ये दर्द जिसे पालता हूँ
बरस दर बरस
सालता हूँ
यही तो मुझे मंजिल की
याद दिलाते हैं.
कहाँ जाना है
यही तो बताते हैं!
November 6, 2009
46. फ़िर भी हर क़तरा दुहाई देगा
जा कहीं से खंज़र
कोई औज़ार ले आ
और छलनी कर दे
इस ह्रदय को
फ़िर भी हर क़तरा
मेरे प्रेम की दुहाई देगा।
लहू का हर क़तरा
तेरा ही नाम लिखेगा...
तेरा ही नाम लिखेगा...
October 29, 2009
45. कहाँ है अमराई?
कहाँ गयी यादों की अरुणाई
बाग़-बाग़ कोयल बोले
कहाँ है वो अमराई?
वो जुगनुओं का जमघट
फूलों पर मंडराते भंवरे
तितलियों के मनमोहक रंग
कहाँ खो गए?
कहाँ गयी रिश्तों की गरमाई?
बाग़-बाग़ कोयल बोले
कहाँ है वो अमराई?
वो जुगनुओं का जमघट
फूलों पर मंडराते भंवरे
तितलियों के मनमोहक रंग
कहाँ खो गए?
कहाँ गयी रिश्तों की गरमाई?
October 28, 2009
44. सुन्दरता के क्या मायने?
प्रकृति से सुन्दर कुछ है?
ईश्वर से सुन्दर कुछ है?
आत्मा से सुन्दर कुछ है?
व्यवहार से भी सुन्दर कुछ है?
तन की सुन्दरता क्षणभंगुर है
माटी की काया
एक दिन माटी में मिल जायेगी
फिर कहो
तन की सुन्दरता क्या
तब भी बनी रह पाएगी?
फिर इस सुन्दरता के क्या मायने?
ईश्वर से सुन्दर कुछ है?
आत्मा से सुन्दर कुछ है?
व्यवहार से भी सुन्दर कुछ है?
तन की सुन्दरता क्षणभंगुर है
माटी की काया
एक दिन माटी में मिल जायेगी
फिर कहो
तन की सुन्दरता क्या
तब भी बनी रह पाएगी?
फिर इस सुन्दरता के क्या मायने?
October 27, 2009
43. वाह! विधाता
एक प्रेम अनुमानित
दूजा प्रेम सघन मौन!
दो ह्रदय मिलन को प्यासे
लेकिन पहल करे कौन??
वाह! विधाता
अजब यह खेल रचा
एक आकृति मस्तक पर खींच
हाथ से दी रेखा मिटा !!
दूजा प्रेम सघन मौन!
दो ह्रदय मिलन को प्यासे
लेकिन पहल करे कौन??
वाह! विधाता
अजब यह खेल रचा
एक आकृति मस्तक पर खींच
हाथ से दी रेखा मिटा !!
42. अधरों से कुछ तो फूटे
कुसुम कोमल
यह रूप धवल
प्यासे अधर
मनमीत विकल.
व्याकुल नयना
राह तके
हर दिन मन में
इक आस जगे.
स्मृतियों में चलचित्र
मधुर मिलन की
पूर्व की स्मृतियाँ ओझल.
पर यह चुप्पी तो टूटे
अधरों से कुछ तो फूटे....
यह रूप धवल
प्यासे अधर
मनमीत विकल.
व्याकुल नयना
राह तके
हर दिन मन में
इक आस जगे.
स्मृतियों में चलचित्र
मधुर मिलन की
पूर्व की स्मृतियाँ ओझल.
पर यह चुप्पी तो टूटे
अधरों से कुछ तो फूटे....
41. कई बार देखा है
कई बार तुम्हें अपने पास
मंडराते देखा है
गुमसुम सी
कहीं खोई सी
आती हो
पर कुछ नहीं कह पाती हो!
द्विविधा में डूबी
निराशा के गर्त में खोई
कहाँ जाना चाहती हो?
मुझमें कुछ पाने की आशा से आती हो
तब ज़रूर मिलेगा
कभी कोई खाली नहीं लौटा.
तुम्हें भी मिलेगा.
थोड़ा धीरज
थोड़ी आस्था तो रखना ही होगा.
कुछ पाना है तो
रास्ता भी ढूँढना होगा.
और कुछ न सही
मुझसे थोड़ा सुकून
थोड़ी शांति ज़रूर मिलेगी.
इस बार आना तो
थोड़ा वक़्त देना
मेरे पास बैठना
मन की बात कहना.
अपने दुःख मुझे सौंप देना
मुझसे ढेरों खुशियाँ ले जाना.
और कुछ चाहिए तो
वह भी बता देना
मन करे तो अपनापन भी जता देना.
मंडराते देखा है
गुमसुम सी
कहीं खोई सी
आती हो
पर कुछ नहीं कह पाती हो!
द्विविधा में डूबी
निराशा के गर्त में खोई
कहाँ जाना चाहती हो?
मुझमें कुछ पाने की आशा से आती हो
तब ज़रूर मिलेगा
कभी कोई खाली नहीं लौटा.
तुम्हें भी मिलेगा.
थोड़ा धीरज
थोड़ी आस्था तो रखना ही होगा.
कुछ पाना है तो
रास्ता भी ढूँढना होगा.
और कुछ न सही
मुझसे थोड़ा सुकून
थोड़ी शांति ज़रूर मिलेगी.
इस बार आना तो
थोड़ा वक़्त देना
मेरे पास बैठना
मन की बात कहना.
अपने दुःख मुझे सौंप देना
मुझसे ढेरों खुशियाँ ले जाना.
और कुछ चाहिए तो
वह भी बता देना
मन करे तो अपनापन भी जता देना.
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