किसने रोका है?
नीचे देखने से पाताल नहीं दिखेगा
हर आहट किसी के
आने की नहीं होती
ऊंचाई से दुनिया बौनी भले दिखे
पर हक़ीक़त में क्या बौनी होती है??
मन के भ्रम हैं
किसी के गिराने से कोई गिरता कहाँ है!!!
आज मेरे वजूद को चुनौती देने वालों
कल मेरा भी दिन आएगा
मैं गया वक़्त नहीं
जो कभी लौट के आ न सकूँगा!
चोट करो, उपहास करो
चाहे जितना प्रयास करो
मैं कोई तृण नहीं
जो उड़ जाऊंगा...
मैं भविष्य के सुनहरे पथ का स्तम्भ हूँ
अगर धंस भी गया तो
मील का पत्थर कहलाऊंगा.
एक डोर से बाँध दिया है खुद को
जब लगे दूर जा रहा हूँ
आहिस्ता अपनी ओर खींचना
रिश्तों को ताज़ा रखना!
न मानूँ, डांटना-फटकारना
कभी प्यार से समझाना...
मैं बहती नदी की मनमौज धारा हूँ
हर बार दूर भागूँगा
नयी राह बनाना मेरी फितरत है.
हमारे रिश्तों को
तुम्ही संभाल के रखना
मैं उसपर जमा गर्द धोता रहूँगा
राह गर मुश्किल लगे कहना
मैं बिछ जाऊंगा.
न कभी दूर होना, न मुझे दूर होने देना,
क्योंकि मैंने खुद को
एक बंधन में बाँध जो दिया है...
बादलो! बरसो पर इतना याद रहे
फुटपाथों पर सोने वाले भी रोते हैं
भीग जाये बिछौना
रात आँखों में काटते हैं …
यमुना तेरे तट पर भी तो लोग रहते हैं
बहते सपने देख क्या ये नहीं रोते हैं!
संयम क्यों गरीब ही रखें
थोड़ा तुम, थोड़ा ये रखें...
अगर मैं लड़की होती
किसी अनजान के साथ
उम्रभर के लिए
बंध गयी होती...
सिगरेट की तरह सुलगती
रसोई में बर्तन घिसती
और घर के किसी कोने में
पड़ी चुपचाप क्या सुबक रही होती!
या अपने भाग्य पर इतराती!
नारी होने पर गौरवान्वित होती!!!
मार्च ८ २०१०
तुम ये वादा करो
कि वादा तोड़ोगे
मुझे हर हाल में
तनहा यूँ ही छोड़ोगे!
रात आएगी विदाई न दूंगा तुमको
पहले उस भरोसे को तोड़ो
कि तुम आओगे.
रात आएगी न बलाओं से रिहाई देगी
हर शख्स की बस धुंधली सी
तस्वीर दिखाई देगी
कह दो एहसासों को मरतें हैं
तो मर जाएँ
तुम न आओगे चाहे लाख मनाएं!!