October 14, 2010

बाँध दिया है खुद को

एक डोर से बाँध दिया है खुद को
जब लगे दूर जा रहा हूँ
आहिस्ता अपनी ओर खींचना
रिश्तों को ताज़ा रखना!
न मानूँ, डांटना-फटकारना
कभी प्यार से समझाना...
मैं बहती नदी की मनमौज धारा हूँ
हर बार दूर भागूँगा
नयी राह बनाना मेरी फितरत है.
हमारे रिश्तों को
तुम्ही संभाल के रखना
मैं उसपर जमा गर्द धोता रहूँगा
राह गर मुश्किल लगे कहना
मैं बिछ जाऊंगा.
न कभी दूर होना, न मुझे दूर होने देना,
क्योंकि मैंने खुद को
एक बंधन में बाँध जो दिया है...

September 10, 2010

संयम

बादलो! बरसो पर इतना याद रहे
फुटपाथों पर सोने वाले भी रोते हैं
भीग जाये बिछौना
रात आँखों में काटते हैं …
यमुना तेरे तट पर भी तो लोग रहते हैं
बहते सपने देख क्या ये नहीं रोते हैं!
संयम क्यों गरीब ही रखें
थोड़ा तुम, थोड़ा ये रखें...

July 27, 2010

सोचता हूँ

अगर मैं लड़की होती
किसी अनजान के साथ
उम्रभर के लिए
बंध गयी होती...
सिगरेट की तरह सुलगती
रसोई में बर्तन घिसती
और घर के किसी कोने में
पड़ी चुपचाप क्या सुबक रही होती!
या अपने भाग्य पर इतराती!
नारी होने पर गौरवान्वित होती!!!
मार्च ८ २०१०

ये वादा करो

तुम ये वादा करो
कि वादा तोड़ोगे
मुझे हर हाल में
तनहा यूँ ही छोड़ोगे!
रात आएगी विदाई न दूंगा तुमको
पहले उस भरोसे को तोड़ो
कि तुम आओगे.
रात आएगी न बलाओं से रिहाई देगी
हर शख्स की बस धुंधली सी
तस्वीर दिखाई देगी
कह दो एहसासों को मरतें हैं
तो मर जाएँ
तुम न आओगे चाहे लाख मनाएं!!

May 7, 2010

तुम याद आओगी

तुम याद आओगी
जब मैं तनहा
छत पर बैठूँगा
और तन को छूकर
गुजर जाया करेगी हवा.

यादों में महका करोगी
संदल सी और
ह्रदय में बसोगी
धड़कन की तरह.
कभी इठलाती
फूलों की डालियों की लचक देखूंगा
तब भी याद आओगी तुम.

भोर की किरणे
जब तहस नहस कर रही होंगी
अँधेरे का साम्राज्य
तब अलसाई आँखों से
आहिस्ता आहिस्ता
एक नयी सुबह देखूंगा
उस वक़्त भी तुम याद आओगी...

April 27, 2010

मैं ज़रूर आऊंगा

मुझे dhundhna याद करना
और मन करे तो
बस एक आवाज़ देना
मैं आऊंगा.
बेला, गुलाब, जूही
चंपा-चमेली के
गुलदस्ते लाऊंगा.
कभी सावन सा बरसूँगा 
मेह बनकर
कभी बसंत के
रंग दे जाऊंगा.
मुझे बुलाना
ज़रूर आऊंगा
आँगन के अमलतास
और दरवाज़े पर खड़े गुलमोहर
की डालों पर फूल दे जाऊंगा
तुम महका करना
मुझे याद करके
चौंका करना
तुमसे मिलूँगा
इन्हीं फूलों के बीच
तुम्हें तारो ताज़ा करने के लिए
कहो बुलाओगी न?


February 28, 2010

कौन रंग रंगूं

कौन रंग रंगूं तोहे श्याम,
पूछें मोरी सखियां,
तोहे लाल ना लगाऊं
पीला ना हरा
अपने ही रंग
तोहे रंग डारूं
कन्हैया मोरे इस फागुन में...