October 27, 2009

40.. हालाहल पीता हूँ

मुझमें मौज फ़क़ीर सी
मस्ती में रहता हूँ
छोड़कर अमृत कलश
हालाहल पीता हू.

39. मुझसे क्या चाहिए?

मुझसे क्या चाहिए?
एक बार कह कर तो देखो
एक यकीन कर के देखो
खुशियों की तलाश में
मुझ तक आती हो
...लेकिन मुझे ही
आहत कर जाती हो.
मुझसे क्या चाहिए?
कहो तो सही...
दो दिन हुए
ह्रदय पर आघात झेलते
पथराई आँखों में
अश्रु तैरते हैं
पर ये भी नहीं निकलते
तुम्हारी यादों कि तरह
अन्दर ही रहना चाहते हैं
मुझसे क्या चाहिए?
एक बार खुद से पूछो
मैं भी खुद से पूछता हूँ
ह्रदय पर
हथौड़े की चोट
और आँखों में अश्क
क्यों लिए घूमता हूँ?
पहले यही दर्द
मेरे होने का
एहसास करते थे
अब ये भी कलेजा दुखाते हैं.
समझ नहीं आता
किसे क्या चाहिए?
मुझे सुकून कि
किसी को मेरा सुकून!

October 25, 2009

38. सब शून्य हो जायेगा

सब शून्य हो जायेगा
जब पहाड़ों की बर्फ़
पिघल जायेगी,
पत्थर पिघल जायेगा.
तब भी समुन्दर का पानी
खारा ही रह जायेगा.

October 22, 2009

"नज़र" लग गयी राजा?

राजा (हुड्डा) तुझे "नज़र" लग ही गयी आखिर. तेरे पिछले करम कुछ अच्छे रहे होंगे शायद.तभी तो सांपनाथ (बिरेन्द्र सिंह) से निपट लिया, अब नाग नाथ (सांसद) से निपट के दिखाओ. नारी शक्ति (सैलजा, किरण चौधरी) तेरी परीक्षा लेने को तैयार बैठी है. जैसे-तैसे तुमने अपनी बचा तो ली, साम्राज्य भी पा लिया.लेकिन सम्राट बन पायेगा कि नहीं यह तो समय ही बताएगा.
किसी की चौधर नहीं रही. पर तूने अपनी बचा ली. अब कोई बचा है जिसकी लंका लगाएगा? नौ रत्न  (नौ सांसद) क्या तुझे राग दरबारी सुनायेंगे? राजा सस्ते में महँगी जान छूटी है. इस जनादेश में सबको कुछ न कुछ मिला है. किसी को झुनझुना तो किसी को मुहमांगी मुराद मिली है. बीस माह के बच्चे को भी बहुत कुछ मिला है.जिसका अस्तित्व मिट गया था...वो कमल भी खिला है. अफ़सोस बहन जी का हाथी धोखा दे गया.पर देख अपनी ताज बचा...महामाई (सोनिया गांधी) के दरबार में शीश झुका...अदब से अर्ज़ कर. उनके हुज़ूर में फरियाद कर.पांच साल जिस जनता को बिजली के झटके दिए तुमने ...देख उसी ने तेरे गले में "हार" पहनाया है. अब इन्हें चाहे प्याज के आंसू रुला या प्यासा रख...सब तेरे हाथ में है.अब पांच साल तक तुझे कोई नहीं रोकेगा...नहीं सुधरा तो समझ अपनी कब्र खुद खोदेगा.
राजा तेरी कुर्सी खतरे में पड़ी है...जिसे तुने जितना दबाया...एक लाइन तक छपने नहीं दिया वो तेरे सिर पर काल बन के नाच रहा है. बीस माह के बच्चे (हजकां) ने भी तेरी राह में कांटें उगा दिए हैं. राजा अब तू चलेगा भी तो उछल-उछल कर.अपना चश्मा बदल राजा ...दूर तक नज़र डाल...ये जो वीराना तुझे दिख रहा है..वो तेरी ही देन है. जिस कुनबे को समेटता रहा, जिसके लिए इतने पापड़ बेले दो कदम भी न चल सके. तूने बड़ी गलती की राजा.अब प्रायश्चित कर और मोह माया का त्याग कर परलोक सुधार.ये जो जनता है न...जब ये बजाती है तो कहीं से आवाज नहीं निकलती...खुदा की बेआवाज़ लट्ठ की तरह पड़ती है. तू सस्ते में छूटा ...अब तो सुधर जा.तू बस तमाशा देख लकड़ी (कुर्सी) का.

October 15, 2009

37. शायद कुछ अच्छा होगा

मन कहता है
कुछ अच्छा होगा
ये जो विश्वास है
और पक्का होगा
अतीत से निकल आया हूँ
यह सोचकर
अब शायद कुछ अच्छा होगा।

36. कह देना सरोकार नही

क्या कहोगी
जब पूछेंगी बहारें
कौन आता है
ख़्वाबों में तुम्हारे?
कह देना
वक्त का मारा कोई मुसाफिर था
राह भटका एक राही था
मैं उसकी पैरोकार नहीं
उस से मेरा सरोकार नहीं।

35. पतझड़ की पगलाई धूप

कभी दुबक बादल में छिप जाती
कभी सिर चढ़ आती है
पतझड़ की पगलाई धूप
पसीने में नहला जाती है।
सावन, भादो
बादल में छिप जाती
आश्विन, कार्तिक
मद्धम पड़ जाती
फ़िर भटकी तो तीन मॉस तक
नज़र न आती
निकले तो पगलाती है।