June 9, 2009

25. शायद भगवान इन्हीं को कहते हैं

कभी उनसे भी पूछिए
जो अट्टालिकाओं में बैठे हैं
गरीबों की नहीं
धनकुबेरों की जो सुनते हैं
जेब खाली हो तो
इनके दर्शन भी दुर्लभ हैं
बगैर चढावे के सुनते नहीं
दुनिया में जो सबसे ताकतवर है
शायद भगवान् उन्ही को कहते हैं ...

April 3, 2008

संस्कृत में शोले

संस्कृत में शोले के संवाद कुछ इस तरह होंगे .....
गब्बर -कालिया तव किम भविष्यसि ?
कालिया - महोदयः मया भवतः लवणं खादितवान।
गब्बर - इदानीं गोलिकाम अपि खादत ...पंचाशत पंचाशत योजनं दूरं यदा को अपि बालकः रुदती , तदा तस्य माता वदति वत्स शयनं कुरु अन्यथा गब्बर आगमिष्यति।

January 16, 2008

24. हो कौन तुम?

हो कौन तुम अरुणिम उषा सी
स्मृतियों में बन मेह
बरसने आयी.
यह किसके ताप से
घनीभूत पीड़ा मस्तक की
अश्रु बन
नैनों से आज बहने आयी
कहो ये अमराई किसकी
बूँद-बूँद पीता हूँ
हरपल उसकी यादों में जीता हूँ।
कहो सखी तुम कौन
मुझसे प्रीत तो सच्ची है?
यकीन नहीं होता हिस्से की
खुशी अभी बची है ...

January 14, 2008

23. चलो बच्चा बन जाएँ

चलो फिर से बच्चा बन जाएँ
यादों की
कच्ची धूप में
बचपन की सैर कर आयें
...और माँ के आँचल से
ढेर सारा स्नेह बटोर लायें...

22. मन चाहता है

आज मन लिखना नहीं
कुछ कर गुज़रना चाहता है
अतीत के स्याह पन्ने से
निकल भागना चाहता है
किसी की यादों में खोने
उसकी अमराई में उतराना
रूप लावण्य को बूँद-बूँद पीना चाहता है
सच कहूं तो
मन अब जीना चाहता है ....

21. मन क्यों भटकता है?

क्यों मन तुम्हारी यादों के सिवा
कहीं और नहीं भटकता?
क्यों यादें मुझे ले जाती हैं तुम तक?
क्यों तरुवर की शाखों से फूल नहीं
तुम्हारी खुशबू बरसती है?
क्यों शाम की तन्हाइयां
अब ड्स्ती नहीं
गुदगुदाती हैं
रोम रोम पुलकित कर जाती हैं?
क्यों मन तुम्हारा आगोश पाने को
आतुर रहता है?
क्यों वह पल थम नहीं जाता
जब हम आलिन्गन्बध्ध होते हैं?
क्यों ज़माने की क्रूर अंगुलियाँ
उठती हैं कलेजे को दुखाने को?
क्यों समझते नहीं लोग
मन के भावों को?

20. साया

जब साया भी साथ छोड़ दे
जीवन से ख़त्म होने लगे उम्मीदें
...और तुम अंधेरों में घिर जाओ
फिर पुकारना
में अवश्य आऊंगा
तुम्हें एक नया आकाश दिखाऊंगा
जहाँ धरती मिलती है
आकाश से!